Chanakya Drishti

Chanakya Niti kavya anuvad Chapter 7

धन के नाश को मन- संताप को, त्रिया चरित्र को वचन नीच को । स्व अपमान को विज्ञ जन जान को, नहीं है कहते, चुप ही रहते । धन-धान्य के लेनदेन में,...

Chanakya Niti kavya anuvad Chapter 6

सुनकर दुर्बुद्धि हट जाती, सुनकर ज्ञान है मानव पाता । मोक्ष भी मिलता सुन सुन करके, सुनकर धर्म समझ में आता पशुओं में कुत्ता चांडाल, खग में क...

Chanakya Niti kavya anuvad Chapter 5

गुरु है अग्नि द्विज जनों का, वर्णों का गुरु विप्र कहाये । पति है गुरु त्रिया मन का अभ्यागत गुरु विश्व कहाये । 4 तरह से कनक परीक्षा, घिस का...

Chanakya Niti kavya anuvad Chapter 4

आयु कर्म, मरण, धन, विद्या, मां के गर्व से ही नर पाता। जैसे जीव है गर्भ में आता, पांच ये बातें लिखें विधाता । साधुजन से अलग हो जाते, पुत्र ...

Chanakya Niti kavya anuvad Chapter 3

कौन है कुल जो दोषहीन है कौन नहीं जो व्याधि पीड़ित । कौन पुरुष जो दुख विहीन है, कौन सा है सुख से मंडित । कुल का परिचय आचार देता, आदर से छिप...

Chanakya Niti kavya anuvad Chapter 2

असत्य भाषण, साहस, माया, अति लालच, मूर्खता भारी । अपवित्र रहना, निर्दयता भी, ये पाती स्वभाव से नारी ॥ भोजन संग में पाचन शक्ति, रतिशक्ति संग...

Chanakya Niti kavya anuvad Chapter 1

करता नमन मैं विष्णु प्रभु को, सिर मैं झुकाता हूँ त्रिलोकी को । राजनीति बतलाता हूँ भू को, उद्धृत है सब शास्त्रों से जो । योग्य-अयोग्य शुभा...

Chanakya Niti kavya anuvad Chapter 17

गुरु की संगति से नहीं विद्या है पाया जो, पुस्तक पढ़कर स्वयं ही विद्या पाया है सो । नहीं समाज में आदर पाता है वह वैसे, व्यभिचारी नारी शोभा प...

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